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सहीह मुस्लिम

नंबर 7409

नंबर 7409किताब 54, नंबर 170अरबी नंबरिंग 2952
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ الأَعْرَابُ إِذَا قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَأَلُوهُ عَنِ السَّاعَةِ مَتَى السَّاعَةُ فَنَظَرَ إِلَى أَحْدَثِ إِنْسَانٍ مِنْهُمْ فَقَالَ ‏ "‏ إِنْ يَعِشْ هَذَا لَمْ يُدْرِكْهُ الْهَرَمُ قَامَتْ عَلَيْكُمْ سَاعَتُكُمْ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported that when the desert Arabs came to Allah's Messenger (ﷺ) they asked about the Last Hour as to when that would come. And he looked towards the youngest amongst them and said:If he lives he would not grow very old that he would find your Last Hour coming to you (he would see you dying)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।