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सहीह मुस्लिम

नंबर 7400

नंबर 7400किताब 54, नंबर 161अरबी नंबरिंग 2948.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ مُعَلَّى بْنِ زِيَادٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ، قُرَّةَ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنَاهُ قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنِ الْمُعَلَّى بْنِ زِيَادٍ، رَدَّهُ إِلَى مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ رَدَّهُ إِلَى مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ رَدَّهُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْعِبَادَةُ فِي الْهَرْجِ كَهِجْرَةٍ إِلَىَّ ‏"‏ ‏.‏
Ma'qil b. Yasar reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:Worshiping during the period of widespread turmoil is like emigration towards me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।