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सहीह मुस्लिम

नंबर 7385

नंबर 7385किताब 54, नंबर 146अरबी नंबरिंग 2941.03
وَحَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي حَيَّانَ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، قَالَ تَذَاكَرُوا السَّاعَةَ عِنْدَ مَرْوَانَ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِهِمَا وَلَمْ يَذْكُرْ ضُحًى ‏.‏
Abu Zur'a reported that there was a discussion in the presence of Marwan about the Last Hour, and Abdullah b. 'Amr said:I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying. The rest of the hadith is the same, but there is no mention of forenoon

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।