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सहीह मुस्लिम

नंबर 7380

नंबर 7380किताब 54, नंबर 141अरबी नंबरिंग 2939.03
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ، أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، كُلُّهُمْ عَنْ إِسْمَاعِيلَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حُمَيْدٍ وَزَادَ فِي حَدِيثِ يَزِيدَ فَقَالَ لِي ‏ "‏ أَىْ بُنَىَّ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Isma'il through other chains of transmitters with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।