सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7365

नंबर 7365किताब 54, नंबर 127अरबी नंबरिंग 2933.03
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ شُعَيْبِ بْنِ الْحَبْحَابِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ الدَّجَّالُ مَمْسُوحُ الْعَيْنِ مَكْتُوبٌ بَيْنَ عَيْنَيْهِ كَافِرٌ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ تَهَجَّاهَا ك ف ر ‏"‏ يَقْرَؤُهُ كُلُّ مُسْلِمٍ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:Dajjal is blind of one eye and there is written between his eyes the word" Kafir". He then spelled the word as k. f. r., which every Muslim would be able to read

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।