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सहीह मुस्लिम

नंबर 7361

नंबर 7361किताब 54, नंबर 123अरबी नंबरिंग 169.05
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ، اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ذَكَرَ الدَّجَّالَ بَيْنَ ظَهْرَانَىِ النَّاسِ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ تَعَالَى لَيْسَ بِأَعْوَرَ ‏.‏ أَلاَ وَإِنَّ الْمَسِيحَ الدَّجَّالَ أَعْوَرُ الْعَيْنِ الْيُمْنَى كَأَنَّ عَيْنَهُ عِنَبَةٌ طَافِئَةٌ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Umar reported that Allah's Messenger (ﷺ). made a mention of Dajjal in the presence of the people and said:Allah is not one-eyed and behold that Dajjal is blind of the right eye and his eye would be like a floating grape

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।