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सहीह मुस्लिम

नंबर 7314

नंबर 7314किताब 54, नंबर 80अरबी नंबरिंग 2912.05
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، وَأَبُو أُسَامَةَ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، عَنْ قَيْسِ، بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تُقَاتِلُونَ بَيْنَ يَدَىِ السَّاعَةِ قَوْمًا نِعَالُهُمُ الشَّعَرُ كَأَنَّ وُجُوهَهُمُ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ حُمْرُ الْوُجُوهِ صِغَارُ الأَعْيُنِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:You shall fight in the hours to come against a nation wearing shoes made of hair and faces like hammered shields, with red complexion and small eyes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।