सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7309

नंबर 7309किताब 54, नंबर 75अरबी नंबरिंग 2911
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ الْعَبْدِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْكَبِيرِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْحَكَمِ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَذْهَبُ الأَيَّامُ وَاللَّيَالِي حَتَّى يَمْلِكَ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ الْجَهْجَاهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ مُسْلِمٌ هُمْ أَرْبَعَةُ إِخْوَةٍ شَرِيكٌ وَعُبَيْدُ اللَّهِ وَعُمَيْرٌ وَعَبْدُ الْكَبِيرِ بَنُو عَبْدِ الْمَجِيدِ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The day and the night would not come to an end before a man called al-Jahjah would occupy the throne

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।