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सहीह मुस्लिम

नंबर 7292

नंबर 7292किताब 54, नंबर 58अरबी नंबरिंग 2905.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ مُسْتَقْبِلُ الْمَشْرِقِ يَقُولُ ‏ "‏ أَلاَ إِنَّ الْفِتْنَةَ هَا هُنَا أَلاَ إِنَّ الْفِتْنَةَ هَا هُنَا مِنْ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنُ الشَّيْطَانِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported that he heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying (in a state) that he had turned his face towards the east:Behold, turmoil would appear from this side, from where the horns of Satan would appear

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।