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सहीह मुस्लिम

नंबर 7265

नंबर 7265किताब 54, नंबर 31अरबी नंबरिंग 2891.04
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ، بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ حُذَيْفَةَ، أَنَّهُ قَالَ أَخْبَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمَا هُوَ كَائِنٌ إِلَى أَنْ تَقُومَ السَّاعَةُ فَمَا مِنْهُ شَىْءٌ إِلاَّ قَدْ سَأَلْتُهُ إِلاَّ أَنِّي لَمْ أَسْأَلْهُ مَا يُخْرِجُ أَهْلَ الْمَدِينَةِ مِنَ الْمَدِينَةِ
Hudhaifa reported:Allah's Messenger (ﷺ) informed me of what is going to happen before the approach of the Last Hour. And there is nothing that I did not ask him in this connection except this that I did not ask him as to what would turn the people of Medina out from Medina

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।