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सहीह मुस्लिम

नंबर 7259

नंबर 7259किताब 54, नंबर 25अरबी नंबरिंग 2889.02
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي أَسْمَاءَ الرَّحَبِيِّ، عَنْ ثَوْبَانَ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ تَعَالَى زَوَى لِيَ الأَرْضَ حَتَّى رَأَيْتُ مَشَارِقَهَا وَمَغَارِبَهَا وَأَعْطَانِي الْكَنْزَيْنِ الأَحْمَرَ وَالأَبْيَضَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ ‏.‏
Thauban reported that Allah's Messenger (ﷺ) said. Verily, Allah drew the ends of the world near me until I saw its east and west, and He bestowed upon me two treasures, the red and the white. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।