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सहीह मुस्लिम

नंबर 7255

नंबर 7255किताब 54, नंबर 21अरबी नंबरिंग 2888.04
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، عَنْ شُعْبَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا الْمُسْلِمَانِ حَمَلَ أَحَدُهُمَا عَلَى أَخِيهِ السِّلاَحَ فَهُمَا فِي جُرُفِ جَهَنَّمَ فَإِذَا قَتَلَ أَحَدُهُمَا صَاحِبَهُ دَخَلاَهَا جَمِيعًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Bakra reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When two Muslims (confront each other) and the one amongst them attacks his brother with a weapon, both of them are at the brink of Hell-Fire. And when one of them kills his companion, both of them get into Hell-Fire

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।