सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7253

नंबर 7253किताब 54, नंबर 19अरबी नंबरिंग 2888.02
وَحَدَّثَنَاهُ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ أَيُّوبَ، وَيُونُسَ، وَالْمُعَلَّى بْنِ زِيَادٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنِ الأَحْنَفِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا الْتَقَى الْمُسْلِمَانِ بِسَيْفَيْهِمَا فَالْقَاتِلُ وَالْمَقْتُولُ فِي النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
Ahnaf b. Qais reported on the authority of Abu Bakra that Allah's Messenger (ﷺ) said:When two Muslims confront each other with their swords, both the slayer and the slain are doomed to Hell-Fire

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।