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सहीह मुस्लिम

नंबर 7245

नंबर 7245किताब 54, नंबर 11अरबी नंबरिंग 2885.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ أَبِي شَيْبَةَ - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ أُسَامَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَشْرَفَ عَلَى أُطُمٍ مِنْ آطَامِ الْمَدِينَةِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ هَلْ تَرَوْنَ مَا أَرَى إِنِّي لأَرَى مَوَاقِعَ الْفِتَنِ خِلاَلَ بُيُوتِكُمْ كَمَوَاقِعِ الْقَطْرِ ‏"‏ ‏.‏
Usama reported that Allah's Messenger (ﷺ) climbed up a battlement amongst the battlements of Medina and then said:You do not see what I am seeing and I am seeing the places of turmoil between your houses as the places of rainfall

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।