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सहीह मुस्लिम

नंबर 7234

नंबर 7234किताब 53, नंबर 103अरबी नंबरिंग 2879
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى التُّجِيبِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ، شِهَابٍ أَخْبَرَنِي حَمْزَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ عَذَابًا أَصَابَ الْعَذَابُ مَنْ كَانَ فِيهِمْ ثُمَّ بُعِثُوا عَلَى أَعْمَالِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Umar reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: When Allah intends to chastise a people, He chastises all of them then they would be raised according to their deeds

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।