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सहीह मुस्लिम

नंबर 7231

नंबर 7231किताब 53, नंबर 100अरबी नंबरिंग 2877.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو دَاوُدَ، سُلَيْمَانُ بْنُ مَعْبَدٍ حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ، عَارِمٌ حَدَّثَنَا مَهْدِيُّ بْنُ، مَيْمُونٍ حَدَّثَنَا وَاصِلٌ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَبْلَ مَوْتِهِ بِثَلاَثَةِ أَيَّامٍ يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يَمُوتَنَّ أَحَدُكُمْ إِلاَّ وَهُوَ يُحْسِنُ الظَّنَّ بِاللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah al-Ansari reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) say three days before his death: None of you should die but hoping only good from Allah, the Exalted and Glorious

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।