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सहीह मुस्लिम

नंबर 7227

नंबर 7227किताब 53, नंबर 96अरबी नंबरिंग 2876.03
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرِ بْنِ الْحَكَمِ الْعَبْدِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ الْقَطَّانَ - حَدَّثَنَا أَبُو يُونُسَ الْقُشَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنِ الْقَاسِمِ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لَيْسَ أَحَدٌ يُحَاسَبُ إِلاَّ هَلَكَ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَيْسَ اللَّهُ يَقُولُ حِسَابًا يَسِيرًا قَالَ ‏"‏ ذَاكِ الْعَرْضُ وَلَكِنْ مَنْ نُوقِشَ الْحِسَابَ هَلَكَ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:Everyone who is reckoned thoroughly is undone. I said: Allah's Messenger, has Allah not called (reckoning) as easy reckoning? Thereupon he said.. It implies only presenta- tion of (one's deeds to Him), but if one is thoroughly examined in reckoning, he in fact is undone

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।