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सहीह मुस्लिम

नंबर 7205

नंबर 7205किताब 53, नंबर 74अरबी नंबरिंग 2863
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ - عَنْ ثَوْرٍ، عَنْ أَبِي الْغَيْثِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الْعَرَقَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ لَيَذْهَبُ فِي الأَرْضِ سَبْعِينَ بَاعًا وَإِنَّهُ لَيَبْلُغُ إِلَى أَفْوَاهِ النَّاسِ أَوْ إِلَى آذَانِهِمْ ‏"‏ ‏.‏ يَشُكُّ ثَوْرٌ أَيَّهُمَا قَالَ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as say- ing:The perspiration would spread on the Day of Resurrection upon the earth to the extent of seventy cubits and it would reach up to their mouths or up to their ears. Thaur is not sure (which words) he used (mouth or ears)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।