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सहीह मुस्लिम

नंबर 7203

नंबर 7203किताब 53, नंबर 72अरबी नंबरिंग 2862.01
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَعُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنُونَ ابْنَ سَعِيدٍ - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏{‏ يَوْمَ يَقُومُ النَّاسُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ‏}‏ قَالَ ‏"‏ يَقُومُ أَحَدُهُمْ فِي رَشْحِهِ إِلَى أَنْصَافِ أُذُنَيْهِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ الْمُثَنَّى قَالَ ‏"‏ يَقُومُ النَّاسُ ‏"‏ ‏.‏ لَمْ يَذْكُرْ يَوْمَ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:When the people stand before Allah, the Lord of the worlds, each one of them would stand submerged into perspiration up to half of his ears, and there is no mention of the "day" in the hadith transmitted on the authority of Ibn Muthanni

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।