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सहीह मुस्लिम

नंबर 7195

नंबर 7195किताब 53, नंबर 64अरबी नंबरिंग 2857.01
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا زَيْدٌ، - يَعْنِي ابْنَ حُبَابٍ - حَدَّثَنَا أَفْلَحُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَافِعٍ، مَوْلَى أُمِّ سَلَمَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يُوشِكُ إِنْ طَالَتْ بِكَ مُدَّةٌ أَنْ تَرَى قَوْمًا فِي أَيْدِيهِمْ مِثْلُ أَذْنَابِ الْبَقَرِ يَغْدُونَ فِي غَضَبِ اللَّهِ وَيَرُوحُونَ فِي سَخَطِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:If you survive for a time you would certainly see people who would have whips in their hands like the tail of an ox. They would get up in the morning under the wrath of Allah and they would get into the evening with the anger of Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।