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सहीह मुस्लिम

नंबर 7185

नंबर 7185किताब 53, नंबर 54अरबी नंबरिंग 2851
حَدَّثَنِي سُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ هَارُونَ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ضِرْسُ الْكَافِرِ أَوْ نَابُ الْكَافِرِ مِثْلُ أُحُدٍ وَغِلَظُ جِلْدِهِ مَسِيرَةُ ثَلاَثٍ ‏"‏ ‏.‏
It is transmitted on the authority of Abu Huraira that Allah's Messenger (ﷺ) said:The molar tooth of an unbeliever or the canine teeth of an unbeliever will be like Uhud and the thickness of his skin a three night's journey

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।