सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7177

नंबर 7177किताब 53, नंबर 46अरबी नंबरिंग 2848.01
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، عَنْ قَتَادَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَزَالُ جَهَنَّمُ تَقُولُ هَلْ مِنْ مَزِيدٍ ‏.‏ حَتَّى يَضَعَ فِيهَا رَبُّ الْعِزَّةِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى قَدَمَهُ فَتَقُولُ قَطْ قَطْ وَعِزَّتِكَ ‏.‏ وَيُزْوَى بَعْضُهَا إِلَى بَعْضٍ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Apostle (ﷺ) said that the Hell would continue to say:Is there anything more, until Allah, the Exalted and High, would place His foot therein and that would say: Enough, enough, by Your Honour, and some parts of it would draw close to the other

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · The Book of Paradise, its Description, its Bounties and its Inhabitants

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।