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सहीह मुस्लिम

नंबर 7125

नंबर 7125किताब 52, नंबर 78अरबी नंबरिंग 2819.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، سَمِعَ الْمُغِيرَةَ بْنَ شُعْبَةَ، يَقُولُ قَامَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم حَتَّى وَرِمَتْ قَدَمَاهُ قَالُوا قَدْ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ أَفَلاَ أَكُونُ عَبْدًا شَكُورًا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Mughira b. Shu'ba and the words are:Allah's Apostle (ﷺ) kept standing in prayer (for such long hours) that his feet were swollen. They (his Companions) said: Verily, Allah has pardoned for thee the earlier and the later of thine sins. Thereupon he said: Should I not prove myself to be a grateful servant (of Allah)?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 52 · Characteristics of the Day of Judgment, Paradise, and Hell

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।