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सहीह मुस्लिम

नंबर 7121

नंबर 7121किताब 52, नंबर 74अरबी नंबरिंग 2817.03
حَدَّثَنِي سَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَعْيَنَ، حَدَّثَنَا مَعْقِلٌ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يُدْخِلُ أَحَدًا مِنْكُمْ عَمَلُهُ الْجَنَّةَ وَلاَ يُجِيرُهُ مِنَ النَّارِ وَلاَ أَنَا إِلاَّ بِرَحْمَةٍ مِنَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
Jabir reported:I heard Allah's Apostle (ﷺ) as saying: None of you would get into Paradise because of his good deeds alone, and he would not be rescued from Fire, not even I, but because of the Mercy of Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 52 · Characteristics of the Day of Judgment, Paradise, and Hell

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।