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सहीह मुस्लिम

नंबर 7106

नंबर 7106किताब 52, नंबर 60अरबी नंबरिंग 2813.02
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ - وَاللَّفْظُ لأَبِي كُرَيْبٍ - قَالاَ أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّ إِبْلِيسَ يَضَعُ عَرْشَهُ عَلَى الْمَاءِ ثُمَّ يَبْعَثُ سَرَايَاهُ فَأَدْنَاهُمْ مِنْهُ مَنْزِلَةً أَعْظَمُهُمْ فِتْنَةً يَجِيءُ أَحَدُهُمْ فَيَقُولُ فَعَلْتُ كَذَا وَكَذَا فَيَقُولُ مَا صَنَعْتَ شَيْئًا قَالَ ثُمَّ يَجِيءُ أَحَدُهُمْ فَيَقُولُ مَا تَرَكْتُهُ حَتَّى فَرَّقْتُ بَيْنَهُ وَبَيْنَ امْرَأَتِهِ - قَالَ - فَيُدْنِيهِ مِنْهُ وَيَقُولُ نِعْمَ أَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ الأَعْمَشُ أُرَاهُ قَالَ ‏"‏ فَيَلْتَزِمُهُ ‏"‏ ‏.‏
जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंने (आज) ऐसा और ऐसा किया है। इब्लीस कहता है: तुमने कुछ नहीं किया। फिर कोई आता है और कहता है: मैंने अमुक व्यक्ति को नहीं छोड़ा, यहाँ तक कि उसके तथा उसकी पत्नी के बीच जुदाई डाल दी। तब शैतान उसे अपने निकट करता है और कहता है: हाँ, तुमने अच्छा किया है। आमश कहते हैं: मैं समझता हूँ कि उन्होंने यह भी कहा था: फिर वह उसे सीने से लगा लेता है।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 52 · Characteristics of the Day of Judgment, Paradise, and Hell

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।