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सहीह मुस्लिम

नंबर 7063

नंबर 7063किताब 52, नंबर 19अरबी नंबरिंग 2795.02
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، كُلُّهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ وَكِيعٍ وَفِي حَدِيثِ جَرِيرٍ قَالَ كُنْتُ قَيْنًا فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَعَمِلْتُ لِلْعَاصِ بْنِ وَائِلٍ عَمَلاً فَأَتَيْتُهُ أَتَقَاضَاهُ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Khabbib through another chain of transmitters and the words are. I in the pre-Islamic days used to work as an iron-smith. I did some work for 'As b. Wa'il and came to him for getting the remuneration of my wages

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 52 · Characteristics of the Day of Judgment, Paradise, and Hell

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।