सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7006

नंबर 7006किताब 50, नंबर 52अरबी नंबरिंग 2764
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ إِسْحَاقَ، بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسٍ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَصَبْتُ حَدًّا فَأَقِمْهُ عَلَىَّ - قَالَ - وَحَضَرَتِ الصَّلاَةُ فَصَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَلَمَّا قَضَى الصَّلاَةَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَصَبْتُ حَدًّا فَأَقِمْ فِيَّ كِتَابَ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هَلْ حَضَرْتَ الصَّلاَةَ مَعَنَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ قَدْ غُفِرَ لَكَ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported that a person came to Allah's Apostle (ﷺ) said:Allah's Messenger, I have committed an offence which deserves imposition of haad, so impose it upon me according to the Book of Allah. Thereupon he said: Were you not present with us at the time of prayer? He said: Yes. Thereupon he said: You have been granted pardon

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।