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सहीह मुस्लिम

नंबर 6988

नंबर 6988किताब 50, नंबर 35अरबी नंबरिंग 2758.03
حَدَّثَنِي عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنِي أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، بْنِ أَبِي طَلْحَةَ قَالَ كَانَ بِالْمَدِينَةِ قَاصٌّ يُقَالُ لَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي عَمْرَةَ - قَالَ - فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ إِنَّ عَبْدًا أَذْنَبَ ذَنْبًا ‏"‏ ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ ‏.‏ وَذَكَرَ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ ‏"‏ أَذْنَبَ ذَنْبًا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الثَّالِثَةِ ‏"‏ قَدْ غَفَرْتُ لِعَبْدِي فَلْيَعْمَلْ مَا شَاءَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported lie heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying that a servant committed a sin. The rest of the hadith is the same, but there is a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।