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सहीह मुस्लिम

नंबर 6985

नंबर 6985किताब 50, नंबर 32अरबी नंबरिंग 2757.02
وَحَدَّثَنَاهُ يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ قَالَ لِي أَبِي حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، كِلاَهُمَا عَنْ قَتَادَةَ، ذَكَرُوا جَمِيعًا بِإِسْنَادِ شُعْبَةَ نَحْوَ حَدِيثِهِ وَفِي حَدِيثِ شَيْبَانَ وَأَبِي عَوَانَةَ ‏"‏ أَنَّ رَجُلاً مِنَ النَّاسِ رَغَسَهُ اللَّهُ مَالاً وَوَلَدًا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ التَّيْمِيِّ ‏"‏ فَإِنَّهُ لَمْ يَبْتَئِرْ عِنْدَ اللَّهِ خَيْرًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَسَّرَهَا قَتَادَةُ لَمْ يَدَّخِرْ عِنْدَ اللَّهِ خَيْرًا ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ شَيْبَانَ ‏"‏ فَإِنَّهُ وَاللَّهِ مَا ابْتَأَرَ عِنْدَ اللَّهِ خَيْرًا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ أَبِي عَوَانَةَ ‏"‏ مَا امْتَأَرَ ‏"‏ ‏.‏ بِالْمِيمِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Shu'ba with the chain of transmitters but with a slight variation of wording and Qatada explained the word" lam yasiru" as:" I find no good in store for rxie in the eye of Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।