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सहीह मुस्लिम

नंबर 6979

नंबर 6979किताब 50, नंबर 27अरबी नंबरिंग 2755
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ، قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، أَخْبَرَنِي الْعَلاَءُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَوْ يَعْلَمُ الْمُؤْمِنُ مَا عِنْدَ اللَّهِ مِنَ الْعُقُوبَةِ مَا طَمِعَ بِجَنَّتِهِ أَحَدٌ وَلَوْ يَعْلَمُ الْكَافِرُ مَا عِنْدَ اللَّهِ مِنَ الرَّحْمَةِ مَا قَنِطَ مِنْ جَنَّتِهِ أَحَدٌ ‏"‏ ‏.‏
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अगर मोमिन जान लेता कि अल्लाह के पास कैसी-कैसी सज़ा है तो वह उसकी जन्नत की लालच नहीं करता और अगर काफ़िर जान लेता कि अल्लाह के पास कितनी दया है तो कोई उसकी जन्नत से निराश नहीं होता।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।