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सहीह मुस्लिम

नंबर 6975

नंबर 6975किताब 50, नंबर 23अरबी नंबरिंग 2753.01
حَدَّثَنِي الْحَكَمُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ النَّهْدِيُّ عَنْ سَلْمَانَ الْفَارِسِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ لِلَّهِ مِائَةَ رَحْمَةٍ فَمِنْهَا رَحْمَةٌ بِهَا يَتَرَاحَمُ الْخَلْقُ بَيْنَهُمْ وَتِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ لِيَوْمِ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Salman Farisi reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Verily, there are one hundred (parts of) mercy for Allah, and it is one part of this mercy by virtue of which there is mutual love between the people and ninety-nine reserved for the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।