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सहीह मुस्लिम

नंबर 6957

नंबर 6957किताब 50, नंबर 6अरबी नंबरिंग 2744.03
وَحَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنَا عُمَارَةُ، بْنُ عُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ الْحَارِثَ بْنَ سُوَيْدٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ، حَدِيثَيْنِ أَحَدُهُمَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَالآخَرُ عَنْ نَفْسِهِ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَلَّهُ أَشَدُّ فَرَحًا بِتَوْبَةِ عَبْدِهِ الْمُؤْمِنِ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ جَرِيرٍ ‏.‏
Abdullah reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Allah is more pleased with the repentance of a believing man. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।