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सहीह मुस्लिम

नंबर 6953

नंबर 6953किताब 50, नंबर 2अरबी नंबरिंग 2675.09
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ الْقَعْنَبِيُّ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِزَامِيَّ - عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَلَّهُ أَشَدُّ فَرَحًا بِتَوْبَةِ أَحَدِكُمْ مِنْ أَحَدِكُمْ بِضَالَّتِهِ إِذَا وَجَدَهَا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Allah is more pleased with the repentance of His servant when he turns penitently towards Him than one of you would be on finding the lost camel

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Repentance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।