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सहीह मुस्लिम

नंबर 6938

नंबर 6938किताब 49, नंबर 2अरबी नंबरिंग 2737.01
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي رَجَاءٍ، الْعُطَارِدِيِّ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ، يَقُولُ قَالَ مُحَمَّدٌ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اطَّلَعْتُ فِي الْجَنَّةِ فَرَأَيْتُ أَكْثَرَ أَهْلِهَا الْفُقَرَاءَ وَاطَّلَعْتُ فِي النَّارِ فَرَأَيْتُ أَكْثَرَ أَهْلِهَا النِّسَاءَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Abbas reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:I had a chance to look into the Paradise and I found that majority of the people was poor and I looked into the Fire and there I found the majority constituted by women

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · The Book of Heart-Melting Traditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।