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सहीह मुस्लिम

नंबर 6935

नंबर 6935किताब 48, नंबर 126अरबी नंबरिंग 2735.02
حَدَّثَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ لَيْثٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، حَدَّثَنِي عُقَيْلُ بْنُ خَالِدٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّهُ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو عُبَيْدٍ، مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ وَكَانَ مِنَ الْقُرَّاءِ وَأَهْلِ الْفِقْهِ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يُسْتَجَابُ لأَحَدِكُمْ مَا لَمْ يَعْجَلْ فَيَقُولُ قَدْ دَعَوْتُ رَبِّي فَلَمْ يَسْتَجِبْ لِي ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The supplication of one of you is granted if he does not grow impatient and say- I supplicated my Lord but it was not granted

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।