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सहीह मुस्लिम

नंबर 6910

नंबर 6910किताब 48, नंबर 103अरबी नंबरिंग 2724
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي، هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ أَعَزَّ جُنْدَهُ وَنَصَرَ عَبْدَهُ وَغَلَبَ الأَحْزَابَ وَحْدَهُ فَلاَ شَىْءَ بَعْدَهُ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Abu Huraira that Allah's Messenge; (ﷺ) used to supplicate thus:" There is no god but Allah, the One Who conferred upon His armies the honour of victory and helped His servant rout the clans; there is nothing after that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।