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सहीह मुस्लिम

नंबर 6893

नंबर 6893किताब 48, नंबर 86अरबी नंबरिंग 2714.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ ثُمَّ لْيَقُلْ بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي فَإِنْ أَحْيَيْتَ نَفْسِي فَارْحَمْهَا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Ubaidullah b. Umar with the same chain of transmitters and he said:Then utter:" My Lord. with Thine name I place my side and if Thou keepest me alive have mercy upon myself

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।