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सहीह मुस्लिम

नंबर 6886

नंबर 6886किताब 48, नंबर 79अरबी नंबरिंग 2710.05
حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي، إِسْحَاقَ أَنَّهُ سَمِعَ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ، يَقُولُ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَجُلاً ‏.‏ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ وَإِنْ أَصْبَحْتَ أَصَبْتَ خَيْرًا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of al-Bara' b. 'Azib that Allah's Messenger (ﷺ) commanded a person (in these words) and there is no mention of this:" if you get up in the morning you would get up with a bliss

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।