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सहीह मुस्लिम

नंबर 6866

नंबर 6866किताब 48, नंबर 60अरबी नंबरिंग 2704.05
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي، عُثْمَانَ عَنْ أَبِي مُوسَى، قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي سَفَرٍ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ عَاصِمٍ ‏.‏
Abu Musa reported:We were along with Allah's Apostle (ﷺ) on a journey; the rest of the hadith is the same as transmitted by A'sim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।