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सहीह मुस्लिम

नंबर 6858

नंबर 6858किताब 48, नंबर 52अरबी नंबरिंग 2702.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ الْعَتَكِيُّ، جَمِيعًا عَنْ حَمَّادٍ، قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنِ الأَغَرِّ الْمُزَنِيِّ، - وَكَانَتْ لَهُ صُحْبَةٌ - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّهُ لَيُغَانُ عَلَى قَلْبِي وَإِنِّي لأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ فِي الْيَوْمِ مِائَةَ مَرَّةٍ ‏"‏ ‏.‏
Al-Agharr al-Muzani, who was one amongst the Companions (of the Holy Prophet) reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:There is (at times) some sort of shade upon my heart, and I seek forgiveness from Allah a hundred times a day

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।