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सहीह मुस्लिम

नंबर 6817

नंबर 6817किताब 48, नंबर 13अरबी नंबरिंग 2681.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي، خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ، قَالَ دَخَلْنَا عَلَى خَبَّابٍ وَقَدِ اكْتَوَى سَبْعَ كَيَّاتٍ فِي بَطْنِهِ فَقَالَ لَوْمَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَانَا أَنْ نَدْعُوَ بِالْمَوْتِ لَدَعَوْتُ بِهِ ‏.‏
Abu Hazim reported:I visited Khabbab who had seven cauteries on his stomach and he said: Had Allah's Messenger (ﷺ) not forbidden us to call for death, I would have done so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।