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सहीह मुस्लिम

नंबर 6809

नंबर 6809किताब 48, नंबर 5अरबी नंबरिंग 2677.01
حَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، جَمِيعًا عَنْ سُفْيَانَ، - وَاللَّفْظُ لِعَمْرٍو - حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لِلَّهِ تِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ اسْمًا مَنْ حَفِظَهَا دَخَلَ الْجَنَّةَ وَإِنَّ اللَّهَ وِتْرٌ يُحِبُّ الْوِتْرَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ أَبِي عُمَرَ ‏"‏ مَنْ أَحْصَاهَا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There are ninety-nine names of Allah; he who commits them to memory would get into Paradise. Verily, Allah is Odd (He is one, and it is an odd number) and He loves odd number. And in the narration of Ibn 'Umar (the words are):" He who enumerated them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।