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सहीह मुस्लिम

नंबर 6752

नंबर 6752किताब 46, नंबर 30अरबी नंबरिंग 2656
حَدَّثَنِي عَبْدُ الأَعْلَى بْنُ حَمَّادٍ، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، بْنُ سَعِيدٍ عَنْ مَالِكٍ، فِيمَا قُرِئَ عَلَيْهِ عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ طَاوُسٍ، أَنَّهُ قَالَ أَدْرَكْتُ نَاسًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُونَ كُلُّ شَىْءٍ بِقَدَرٍ ‏.‏ قَالَ وَسَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ كُلُّ شَىْءٍ بِقَدَرٍ حَتَّى الْعَجْزُ وَالْكَيْسُ أَوِ الْكَيْسُ وَالْعَجْزُ ‏"‏ ‏.‏
ताऊस का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कुछ साथियों को पाया, वे कहते थे कि हर चीज़ तक़दीर के अनुसार सामने आती है। ताऊस कहते हैं कि मैंने अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा को कहते हुए सुना है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "हर चीज़ तक़दीर के अनुसार सामने आती है, यहाँ तक कि अक्षमता तथा सक्षमता भी या सक्षमता तथा अक्षमता भी।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 46 · The Book of Destiny

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।