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सहीह मुस्लिम

नंबर 6714

नंबर 6714किताब 45, नंबर 209अरबी नंबरिंग 2639.05
حَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَمْ يَذْكُرْ قَوْلَ أَنَسٍ فَأَنَا أُحِبُّ ‏.‏ وَمَا بَعْدَهُ ‏.‏
Anas b. Malik reported Allah's Apostle (ﷺ) this hadith through another chain of transmitters but he did not make mention of the words of Anas:I love, and what follows subsequently

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।