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सहीह मुस्लिम

नंबर 6697

नंबर 6697किताब 45, नंबर 194अरबी नंबरिंग 2632.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، بْنُ عُيَيْنَةَ ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، وَابْنُ، رَافِعٍ عَنْ عَبْدِ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، ‏.‏ بِإِسْنَادِ مَالِكٍ وَبِمَعْنَى حَدِيثِهِ إِلاَّ أَنَّ فِي حَدِيثِ سُفْيَانَ ‏ "‏ فَيَلِجَ النَّارَ إِلاَّ تَحِلَّةَ الْقَسَمِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been reported by Zuhri on the authority of Malik, and in the hadith transmitted on the authority of Sufyan (the words are):" He would enter into Fire, except for the fulfilment of the oath

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।