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सहीह मुस्लिम

नंबर 6689

नंबर 6689किताब 45, नंबर 186अरबी नंबरिंग 2625.03
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ إِنَّ خَلِيلِي صلى الله عليه وسلم أَوْصَانِي ‏ "‏ إِذَا طَبَخْتَ مَرَقًا فَأَكْثِرْ مَاءَهُ ثُمَّ انْظُرْ أَهْلَ بَيْتٍ مِنْ جِيرَانِكَ فَأَصِبْهُمْ مِنْهَا بِمَعْرُوفٍ ‏"‏ ‏.‏
Abu Dharr reported Allah's Messenger (ﷺ) commanded me thus:Whenever you prepare a broth, add water to it, and have in your mind the members of the household of your neighbours and then give them out of this with courtesy

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।