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सहीह मुस्लिम

नंबर 6687

नंबर 6687किताब 45, नंबर 184अरबी नंबरिंग 2625.01
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا زَالَ جِبْرِيلُ يُوصِينِي بِالْجَارِ حَتَّى ظَنَنْتُ أَنَّهُ سَيُوَرِّثُهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Umar reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Gabriel impressed upon me (the kind treatment) towards the neighbour (so much) that I thought as if he would soon confer upon him the (right) of inheritance

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।