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सहीह मुस्लिम

नंबर 6666

नंबर 6666किताब 45, नंबर 163अरबी नंबरिंग 2616.01
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالَ عَمْرٌو حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ أَبُو الْقَاسِمِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَشَارَ إِلَى أَخِيهِ بِحَدِيدَةٍ فَإِنَّ الْمَلاَئِكَةَ تَلْعَنُهُ حَتَّى وَإِنْ كَانَ أَخَاهُ لأَبِيهِ وَأُمِّهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:Abu'l-Qasim (the kunya of Allah's Messenger, may peace be upon him), said: He who pointed a weapon towards his brother the angels invoke curse upon him even if he is his real brother so long as he does not abandon it (the pointing of weapon towards one's brother Muslim)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।