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सहीह मुस्लिम

नंबर 6662

नंबर 6662किताब 45, नंबर 159अरबी नंबरिंग 2614.02
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو الرَّبِيعِ، قَالَ أَبُو الرَّبِيعِ حَدَّثَنَا وَقَالَ، يَحْيَى - وَاللَّفْظُ لَهُ - أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَجُلاً، مَرَّ بِأَسْهُمٍ فِي الْمَسْجِدِ قَدْ أَبْدَى نُصُولَهَا فَأُمِرَ أَنْ يَأْخُذَ بِنُصُولِهَا كَىْ لاَ يَخْدِشَ مُسْلِمًا ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported that a person happened to come to the mosque with arrows and their iron-ends were exposed, so he was commanded that he should grasp the pointed heads so that these might not do any harm to a Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।