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सहीह मुस्लिम

नंबर 6660

नंबर 6660किताब 45, नंबर 157अरबी नंबरिंग 2613.04
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُرْوَةَ، بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّ هِشَامَ بْنَ حَكِيمٍ، وَجَدَ رَجُلاً وَهُوَ عَلَى حِمْصَ يُشَمِّسُ نَاسًا مِنَ النَّبَطِ فِي أَدَاءِ الْجِزْيَةِ فَقَالَ مَا هَذَا إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ يُعَذِّبُ الَّذِينَ يُعَذِّبُونَ النَّاسَ فِي الدُّنْيَا ‏"‏ ‏.‏
Urwa b. Zubair reported that Hisham b. Hakim found a person (the ruler of Hims) who had been detaining some Nabateans in connection with the dues of Jizya. He said:What is this? I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: Allah would torment those persons who torment people in the world

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।